1.उस रात के बाद
बाजार अचानक सोलहवीं सदी का
बंदरगाह हो गया
करोड़ो वर्ष की बनी हुई
पृथ्वी
अचानक थम गई
इधर दुनिया ब्रह्मा के इशारे
की प्रतीक्षा में है
सिर्फ चूहों के दाँत में
चिपके हैं लकड़ी के बुरादे
हजारों देह गुँजलक बाँधे
पड़ी है
होठों पर मुस्कुराहट
ही हमारा ऐश्वर्य था
अँधेरों का
बच्चों की मूँदी हुई
आँखें आसमान की तरह खुली
कत्लोगारत के बाद
झींगुरों से थक चुकी
गलियाँ शामिल थी अब
एक बहशी शोर में
मुहल्ले में पहली बार
उजाला आया था
अब हम बिना नख-दंत
एक-दूसरे को नोच रहे हैं
काँच पर फैलते रक्त
की तरह सुबह हुई है ।
संजय कुमार शांडिल्य
2.
देह गुम हुई परछाई में
रूह हुई ग्लोबल ।
दुनिया फैली पर मानवता
सुकड़ी चली गई
दीवारों की माटी
लोनी उखड़ी चली गई
वेष-भाव-भाषा में
हम हैं कितनी बुरी नकल ।
गिफ्ट नहीं दे पाया भाई
कार्ड नहीं भेजे
सीनों में आ धँसे ननद के
तानों के नेजे
ससुराली दो-चार साल में
बहनें गई बदल
मिनटों में आकाश छू गई
लाखों बिकी हुई खलिहानें
लाचारी के द्वार-द्वार पर
पनसारी की खुली दुकानें
घर के नजदीकी रिश्तों को
अजगर गया निगल ।
संजय कुमार शांडिल्य
Mr Shandilya Sir is published author and teacher at Sainik school. TeamDodder is thankful to him for his permission to publish his poetry.
बाजार अचानक सोलहवीं सदी का
बंदरगाह हो गया
करोड़ो वर्ष की बनी हुई
पृथ्वी
अचानक थम गई
इधर दुनिया ब्रह्मा के इशारे
की प्रतीक्षा में है
सिर्फ चूहों के दाँत में
चिपके हैं लकड़ी के बुरादे
हजारों देह गुँजलक बाँधे
पड़ी है
होठों पर मुस्कुराहट
ही हमारा ऐश्वर्य था
अँधेरों का
बच्चों की मूँदी हुई
आँखें आसमान की तरह खुली
कत्लोगारत के बाद
झींगुरों से थक चुकी
गलियाँ शामिल थी अब
एक बहशी शोर में
मुहल्ले में पहली बार
उजाला आया था
अब हम बिना नख-दंत
एक-दूसरे को नोच रहे हैं
काँच पर फैलते रक्त
की तरह सुबह हुई है ।
संजय कुमार शांडिल्य
2.
देह गुम हुई परछाई में
रूह हुई ग्लोबल ।
दुनिया फैली पर मानवता
सुकड़ी चली गई
दीवारों की माटी
लोनी उखड़ी चली गई
वेष-भाव-भाषा में
हम हैं कितनी बुरी नकल ।
गिफ्ट नहीं दे पाया भाई
कार्ड नहीं भेजे
सीनों में आ धँसे ननद के
तानों के नेजे
ससुराली दो-चार साल में
बहनें गई बदल
मिनटों में आकाश छू गई
लाखों बिकी हुई खलिहानें
लाचारी के द्वार-द्वार पर
पनसारी की खुली दुकानें
घर के नजदीकी रिश्तों को
अजगर गया निगल ।
संजय कुमार शांडिल्य
Mr Shandilya Sir is published author and teacher at Sainik school. TeamDodder is thankful to him for his permission to publish his poetry.

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